रांची: झारखंड सरकार ग्रामीण इलाकों में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त और सुचारू बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। जल जीवन मिशन 2.0 के तहत अब राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत में तीन-तीन ‘नल-जल मित्रों’ (जल-मित्रों) का चयन किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी योजना के प्रस्ताव को मुख्य सचिव ने अपनी आधिकारिक स्वीकृति दे दी है।
इस फैसले से राज्य भर में लगभग 13,000 से अधिक स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
क्या होगा ‘जल-मित्रों’ का काम?
ग्रामीण क्षेत्रों में पाइपलाइन और नल से जल आपूर्ति योजनाओं के शुरू होने के बाद अक्सर रख-रखाव (Maintenance) की समस्या सामने आती है। इसी को दूर करने के लिए इन जल-मित्रों को तैनात किया जा रहा है।
- तकनीकी देखभाल: पंचायतों में नल-जल योजनाओं के तहत बिछाई गई पाइपलाइनों, मोटरों और नलों की तकनीकी खराबी को दूर करना।
- त्वरित मरम्मत: गांव में पानी की सप्लाई बाधित होने पर स्थानीय स्तर पर ही तुरंत मरम्मत सुनिश्चित करना।
- गुणवत्ता की निगरानी: ग्रामीणों तक पहुंचने वाले पीने के पानी की शुद्धता और नियमित आपूर्ति की देखरेख करना।
स्थानीय युवाओं को रोजगार और विशेष ट्रेनिंग
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए स्थानीय ग्रामीणों और युवाओं को ही प्राथमिकता दी जाएगी।
- चयन के बाद इन युवाओं को पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा विशेष तकनीकी प्रशिक्षण (Technical Training) दिया जाएगा।
- इन्हें प्लंबिंग, इलेक्ट्रिकल वर्क और मोटर मरम्मत जैसे कार्यों में दक्ष बनाया जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में ही रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
योजनाओं के बंद होने की समस्या से मिलेगी मुक्ति
अक्सर देखा जाता है कि मामूली तकनीकी खराबी या ऑपरेटर न होने के कारण करोड़ों की लागत से बनी ग्रामीण जलापूर्ति योजनाएं ठप पड़ जाती हैं। मुख्य सचिव की मंजूरी के बाद अब हर पंचायत में तीन-तीन समर्पित ‘जल-मित्र’ मौजूद रहेंगे, जिससे जल संकट की समस्याओं का ऑन-स्पॉट निपटारा हो सकेगा। सरकार का लक्ष्य है कि इस कदम से राज्य के अंतिम व्यक्ति तक स्वच्छ पेयजल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। जल्द ही विभाग की ओर से इसके चयन की विस्तृत गाइडलाइन और मानदेय (Honorarium) से जुड़ी शर्तें जारी कर दी जाएंगी।

